वित्त वर्ष 2026-27 में घरेलू बाजारों में सोने-चांदी की कीमतें मध्यम गति से तेज रहने की उम्मीद है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध का डर और वैश्विक स्तर पर मंदी का बढ़ता जोखिम 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित निवेश) की मांग को बढ़ा सकता है, भले ही ऊंची ब्याज दरें कीमतों में तेज उछाल को सीमित कर सकती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, घरेलू मोर्चे पर चांदी का वायदा भाव 1 अप्रैल, 2025 को दर्ज 99,461 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1,41,431 रुपये (142.2 प्रतिशत) बढ़ गए। जबकि, सोना इस दौरान दर्ज 90,503 रुपये प्रति 10 ग्राम से 60,258 रुपये (67 प्रतिशत) बढ़ गया।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 142 प्रतिशत महंगी हुई चांदी
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चांदी में 142 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जबकि सोने में लगभग 67 प्रतिशत की तेजी आई। जिसकी मुख्य वजह अमेरिका का टैरिफ वॉर, भू-राजनीतिक तनाव, सेंट्रल बैंकों द्वारा भारी खरीदारी, सप्लाई में बाधा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रही। चॉइस ब्रोकिंग में कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा ने बताया, ''वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सोने और चांदी का दृष्टिकोण मध्यम तेजी वाला रहेगा। चूंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और वैश्विक मंदी के डर के कारण एक मुश्किल दौर से गुजर रही है, इसलिए 'सेफ-हेवन' संपत्तियों की मांग बढ़ेगी।''
वित्त वर्ष के आखिर में तेज गिरावट
मजबूत बढ़त के बावजूद, वित्त वर्ष के आखिर में सर्राफा की कीमतों में तेज गिरावट या तकनीकी सुधार देखने को मिला। सिर्फ मार्च में, सोने की कीमतें 11,343 रुपये (7 प्रतिशत) नीचे आ गईं, जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी 41,752 रुपये (15 प्रतिशत) टूट गई। हालिया कीमतों में गिरावट पर उन्होंने कहा, ''ऐतिहासिक रूप से 'सेफ-हेवन' एसेट के रूप में सोने की मांग युद्ध की स्थितियों के दूसरे चरण में बढ़ने की संभावना होती है, जब डॉलर की बढ़त सीमित हो जाती है।'' हालांकि, मकदा ने आगाह किया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने से सर्राफा कीमतों में तेज उछाल सीमित हो सकता है।
चांदी में भी बनी रहेगी मध्यम तेजी
वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी के शानदार प्रदर्शन के बारे में बताते हुए मकदा ने इसका श्रेय लगातार 5 साल से बनी हुई सप्लाई की कमी, सोलर फोटोवोल्टिक और इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री से रिकॉर्ड मांग और ईटीएफएस में संस्थागत निवेश में तेजी को दिया। इन सबने मिलकर चांदी के अपेक्षाकृत छोटे बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा दिया। मकदा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में चांदी में मध्यम तेजी बनी रहेगी। घरेलू बाजार में कीमतें करेंसी में उतार-चढ़ाव के आधार पर 2.75 लाख से 3.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहने की संभावना है।